स्मार्ट वर्क से जीवन सफल बनाएं - करोड़पति ही नहीं, अरबपति बनें

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है इंडियन प्राइम वीडियो हिंदी चैनल पर। क्या सच में मेहनत ही सफलता की चाबी है या कोई ऐसी सिस्टम है जो अमीरों को करोड़पति बनाती है? इस वीडियो में जानिए कैसे स्मार्ट वर्क से आप अपनी जिंदगी बदल सकते हैं। अगर आप भी असली सफलता का राज जानना चाहते हैं तो वीडियो को अंत तक देखें और कमेंट करें।
https://youtu.be/XU8NxIPT1Pg
 चलिए शुरू करते हैं द लेजी बिलिनेयर की कहानी से। जो व्यक्ति हर ठोकर के बाद भी खड़ा रहता है वही सच्चा विजेता कहलाता है। एक मजदूर दिन रात पसीना बहाता रहा। उसके हाथों में छाले थे। आंखों में थकान और जेब खाली। वह मानता था कि मेहनत ही सब कुछ है। वहीं एक अन्य व्यक्ति दिन में केवल 2 घंटे काम करता। बाकी समय वह किताबों में ज्ञान खोजता, सिस्टम बनाता और विश्राम करता। लोगों ने उसे आलसी कहा। पर कुछ वर्षों में वही व्यक्ति करोड़ों का मालिक बन गया। क्यों? क्योंकि उसने समझा कि सफलता सिर्फ मेहनत नहीं एक बेहतर प्रणाली से मिलती है। वास्तव में धन कुबेर कभी ज्यादा मेहनत नहीं करते। वे लीवरेज करते हैं। वे केवल वह काम करते हैं जो परिणाम लाता है। तेजी से भागती दुनिया में जो रुकता है वह पीछे रह जाता है और जो सोचता है वही आगे निकलता है। इस पुस्तक सारांश में आपको वह सारे छुपे नियम मिलेंगे जो सफल लोग जानते हैं पर दुनिया से छिपाते हैं। किसी ने पसीना बहाया और खाली हाथ लौटा। किसी ने दिमाग लगाया और सफलता का ताज पहना। मेहनत का भ्रम और असली रणनीति सोचिए। अगर सिर्फ मेहनत से ही सफलता मिलती तो सबसे अमीर लोग वो होते जो ईंट ढोते, सड़कें बनाते या खेतों में पसीना बहाते। लेकिन असलियत यह है कि दुनिया के सबसे मेहनती लोग अक्सर आर्थिक रूप से सबसे नीचे होते हैं। क्यों? क्योंकि मेहनत एक साधन है, लेकिन सफलता का असली हथियार है रणनीति। अब एक उदाहरण लो बिल गेट्स। उन्होंने एक बार कहा था, मैं एक आलसी इंसान को कठिन काम इसलिए देता हूं क्योंकि वह सबसे आसान तरीका ढूंढ निकालेगा। क्या इसका मतलब है कि आलसी होना अच्छा है? नहीं। इसका मतलब है कि समझदारी से काम लेना, सही तरीका अपनाना और सोच को प्राथमिकता देना असली सफलता की कुंजी है। इसलिए जरूरी है कि आप यह पूछें। क्या मैं वही काम कर रहा हूं जो मुझे सफलता देगा? क्या मेरा परिश्रम एक स्पष्ट दिशा में जा रहा है या बस एक व्यस्तता है? क्या मैं अपनी मेहनत को एक सिस्टम में बदल सकता हूं? आपको दिन रात पसीना बहाने की जरूरत नहीं है। अगर आप ऐसा सिस्टम बना लें जो आपके लिए लगातार काम करता रहे। उदाहरण के लिए जेफ बेजोस ने अमेजन शुरू किया। लेकिन किताबें उसने नहीं लिखी। पैकेट उसने नहीं बांधे। उसने एक विज़न बनाया और फिर उस विज़न को सिस्टम में बदला। अब वह सिस्टम उसके लिए काम करता है। 24 घंटे 7 दिन चाहे वह जाग रहा हो या सो रहा हो। असल सवाल यह नहीं है कि आप कितनी मेहनत करते हैं। असल सवाल है क्या आप वही काम कर रहे हैं जो सबसे ज्यादा असरदार हैं? जब आप बार-बार वही काम करते हैं, वही गलती दोहराते हैं और फिर उम्मीद करते हैं कि नतीजा बदलेगा तो आप मेहनत कर रहे हैं। लेकिन बिना सिस्टम के। एक सिस्टम का मतलब है ऐसा तरीका जो दोहराया जा सके, मापा जा सके और बेहतर बनाया जा सके। ज्यादातर लोग लक्ष्य तय करते हैं। मुझे 10 लाख कमाने हैं। मुझे फिट होना है। बिजनेस सफल बनाना है। लेकिन लक्ष्य एक बार सोचने से नहीं पूरे होते। जो लोग सफलता पाते हैं, वह एक सिस्टम बनाते हैं जो रोज उन्हें उस मंजिल की ओर ले जाता है। वहां तक पहुंचने की सड़क है एक लक्ष्य। मैं बेस्ट सेलर किताब लिखूंगा। सिस्टम मैं हर दिन 500 शब्द लिखूंगा। लक्ष्य मैं 10 किलो वजन घटाऊंगा। सिस्टम मैं हर दिन 30 मिनट वॉक करूंगा और शुगर कम करूंगा। कई बार लोग कहते हैं मेरा लक्ष्य बहुत बड़ा है लेकिन उन्होंने उसे पाने का कोई सिस्टम ही नहीं बनाया और फिर हार मान लेते हैं। जिन्होंने इतिहास बदला है जैसे ईलॉन मस्क, स्टीव जॉब्स या धीरूभाई अंबानी उन्होंने सपने जरूर देखे लेकिन उन सपनों को हकीकत में बदलने के लिए सिस्टम तैयार किया। सिस्टम कैसे बनाएं? छोटे टुकड़ों में बांटें। अपने लक्ष्य को रोजमर्रा की आदतों में तोड़ें। कंसिस्टेंसी सेट करें। रोज थोड़ा करें लेकिन कभी रुके नहीं। मापने योग्य बनाएं। जो नहीं मापा जा सकता वो सुधारा नहीं जा सकता। ऑटोमेट करें। जितना काम बिना सोच के हो सके उतना सिस्टम में डालें। इंप्रूवमेंट की जगह रखें। सिस्टम स्टैटिक नहीं डायनेमिक होना चाहिए। सिस्टम का सबसे बड़ा लाभ आप परफेक्ट नहीं हैं। कभी बीमार होंगे, कभी थक जाएंगे, कभी मन नहीं करेगा। लेकिन सिस्टम आपका साथ नहीं छोड़ेगा। जहां इंसान कमजोर पड़ता है, वहां सिस्टम स्थिरता देता है। सबके पास दिन के सिर्फ 24 घंटे होते हैं। ना ज्यादा ना कम। फिर कुछ लोग इतना कुछ कर जाते हैं, कंपनियां खड़ी कर लेते हैं, किताबें लिख लेते हैं, करोड़ों कमा लेते हैं। और वहीं कुछ लोग शिकायतों में उलझे रह जाते हैं। मेरे पास टाइम नहीं है। असल में फर्क समय नहीं समय का इस्तेमाल करने में है। समय नहीं मिलता समय बनाना पड़ता है। आप रोज 24 घंटे खर्च कर रहे हैं। सवाल यह है कहां सोशल मीडिया पर बिना उद्देश्य की मीटिंग्स में ऐसे लोगों के साथ जिनसे कुछ सीखने को नहीं मिलता। याद रखिए समय वो करेंसी है जो रोज घट रही है और सबसे अमीर वो नहीं जिसके पास पैसे ज्यादा हैं। सबसे अमीर वो है जो अपने समय को सबसे समझदारी से इन्वेस्ट करता है।

समय पर जीत कैसे पाएं? काम को समय में नहीं रिजल्ट में नापिए। मैं 2 घंटे काम करूंगा से बेहतर है मैं यह टास्क पूरा करूंगा।  नहीं कहना सीखिए। हर हां आपको आपके लक्ष्य से दूर कर सकती है। हां, तभी कहिए जब वह चीज आपकी दिशा से मेल खाए। पहले दिन की सबसे अहम चीज करें ईट दैट फ्रॉग। सुबह उठते ही सबसे मुश्किल और जरूरी काम निपटा दीजिए। दिनभर की प्रोडक्टिविटी 2 एक्स हो जाएगी।

डिजिटल डोपामाइन से बचिए। हर 10 मिनट में Instagram चेक करना हर नोटिफिकेशन पर ध्यान देना। पैसा बुरा नहीं है। बुरी है हमारी सोच। हमारे समाज में पैसे को लेकर दो तरह की बातें आम है। पैसे से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता। अमीर लोग तो घमंडी होते हैं, लेकिन हकीकत यह है पैसा एक ताकत है और ताकत का इस्तेमाल अच्छा या बुरा इंसान पर निर्भर करता है। पैसे को समझने के तीन रूल पैसा कमाना नहीं बनाना सीखो। नौकरी से सिर्फ कमाते हो। स्किल, बिजनेस, इन्वेस्टमेंट से पैसा बनता है। पैसे को रोकना जरूरी है। जो कमाता है वह अमीर नहीं बनता। जो बचाता और बढ़ाता है वही असली खिलाड़ी है। हर रुपया एक बीज है। खर्च करोगे खत्म हो जाएगा। निवेश करोगे पेड़ बनेगा। अमीर बनने की शर्म छोड़ो। जब कोई कहता है पैसा जरूरी नहीं है। वो या तो झूठ बोल रहा है या उसने कभी असली आजादी नहीं देखी। पैसे से आप अपने माता-पिता का ख्याल रख सकते हैं। अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकते हैं। दुनिया में बदलाव ला सकते हैं। पैसे से सब कुछ नहीं आता पर बहुत कुछ आसान हो जाता है। लोग सोचते हैं नेटवर्किंग मतलब पार्टी में जाना, हाथ मिलाना, कार्ड देना। सच यह है असली नेटवर्किंग कोई टेक्निक नहीं एक सोच है। असली नेटवर्किंग की तीन सच्चाइयां देने वाले बनो लेने वाले नहीं। लोग ऐसे लोगों को याद रखते हैं जो क्या मदद कर सकता हूं। पूछते हैं ना कि मेरे लिए क्या कर सकते हो। रिश्ते एक दिन में नहीं बनते। नेटवर्किंग मतलब बीज बोना, पानी देना, धैर्य रखना। हर इंसान की अहमियत समझो। बड़ी पहुंच वाले लोग काम आ सकते हैं, लेकिन छोटे लोग दुआएं देते हैं और दुआ भी बहुत बड़ी चीज है। नेटवर्क बढ़ाने का असली तरीका किसी का काम आसान करो, ईमानदारी से तारीफ करो, जवाब दो, भले देर से दो, कभी मदद मांगो और कभी मदद दो। एक छोटी कहानी। राजू नाम का एक लड़का हर इवेंट में जाता था। लोगों को कार्ड देता, सेल्फी लेता। लेकिन कोई उसे याद नहीं रखता था। फिर उसने सोचना बदला। अब वह लोगों से पूछता आप क्या कर रहे हैं? मैं कैसे मदद कर सकता हूं? आज राजू की पहुंच वहां है जहां डिग्रियां नहीं रिश्ते काम आते हैं। आज का सवाल यह है मैं अपने आप को दूसरों के लिए इतना महत्वपूर्ण कैसे बना सकता हूं कि वे मुझसे जुड़े रहना चाहें। वैल्यू यानी क्या? वैल्यू मतलब आपके अंदर जो कुछ खास है जो दूसरों के काम आता है। अपनी वैल्यू बढ़ाने के पांच आसान
तरीके। नए स्किल सीखो। हर दिन थोड़ी सी नई चीज सीखो। चाहे वो काम की हो या जीवन की। जैसे मोबाइल चलाना आता था। अब उसमें नए ऐप सीखो। लोगों की मदद करो। जब भी मौका मिले बिना वजह मदद करो। लोगों को दिखाओ कि तुम पर भरोसा किया जा सकता है। सुनने की कला सीखो। अच्छा बोलना जरूरी नहीं। अच्छा सुनना जरूरी है। समय की कदर करो। दूसरों के समय की भी, समय पर पहुंचो। समय पर काम करो। अपनी बात को साफ और भरोसेमंद बनाओ। जो कहते हो वो करो। छोटे-छोटे वादे निभाओ। इसी से लोग तुम पर विश्वास करेंगे। एक छोटी सी कहानी सीमा एक लड़की थी जो हमेशा समय पर ऑफिस आती। अपने काम में माहिर थी और हर किसी की बात ध्यान से सुनती। लोग उसे काम के लिए ही नहीं सलाह के लिए भी बुलाते थे। सीमा की वैल्यू बढ़ी इसलिए उसे प्रमोशन मिला। जिंदगी में सही लोगों का होना बहुत जरूरी है। क्योंकि हम वही बन जाते हैं जिनके साथ समय बिताते हैं। सही लोग कौन होते हैं? वो जो आपको बढ़ावा दें, गिराएं नहीं जो आपके सपनों को समझें और उनका सम्मान करें। जो मुश्किल वक्त में साथ निभाएं जो ईमानदार और भरोसेमंद हो। गलत लोग कैसे पहचाने जो हमेशा नकारात्मक बात करें जो आपकी मेहनत की कदर ना करें जो आपके सपनों को छोटा दिखाएं जो आपको गलत राह पर ले जाएं सही लोग चुनने के लिए तीन टिप्स धैर्य से जानो उन्हें।  किसी को जल्दी दोस्त मत बनाओ समय दो कि उनकी असली सोच और स्वभाव समझ आ जाए अपने अंदर की आवाज सुनो अगर कोई आपको अच्छा महसूस नहीं कराता तो दूरी बनाओ अपनी भावना पर भरोसा रखो समय के साथ दोस्ती को परखो सच्चे रिश्ते वक्त के साथ मजबूत होते हैं। जो जल्दी टूट जाए वह सही नहीं। एक छोटी सी कहानी। नीरज को लगा कि वह अपने दोस्तों के साथ खुश है। पर वे लोग उसे हमेशा टोकते और उसकी आलोचना करते थे। फिर उसने नए दोस्त बनाए जो उसे सपोर्ट करते थे। अब उसकी जिंदगी में खुशियां बढ़ गई। समय सबसे कीमती चीज है। एक बार निकल जाए तो वापस नहीं आता। इसलिए समय का सही इस्तेमाल सीखना बहुत जरूरी है। समय प्रबंधन क्यों जरूरी है? इससे आप ज्यादा काम कर पाते हैं। तनाव कम होता है। लक्ष्यों को पाने में मदद मिलती है। जीवन संतुलित रहता है। तीन आसान तरीके अपने समय को संभालने के लिए। दिन की योजना बनाएं। सुबह उठते ही दिन भर का काम लिख लें। सबसे जरूरी काम पहले करें। काम को छोटे हिस्सों में बांटें। बड़ा काम एक बार में ना करें। छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर करें। फोन और सोशल मीडिया पर नियंत्रण रखें। यह समय बर्बाद करने वाले हैं। काम के वक्त इन्हें दूर रखें। अगर यह वीडियो आपकी सोच को छू पाया हो तो इसे लाइक करें। अपनों के साथ शेयर करें और ऐसे ही प्रभावशाली कंटेंट के लिए सब्सक्राइब जरूर करें।

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